असमंजस
By Aakash Deep
क्षितिज पर खिंची जन्ममृत्यु सी रेखा,
असंमजस में व्यतीत होता एक एक क्षण,
और इनके मध्य सौदेबाजी करता जीवन,
ज़ुल्मत बिंदु पर स्तब्ध सा खड़ा मैं
बहिश्त के लिये किस ओर से होकर गुजरूं?
जो संशयग्रस्त बिन्दु पर थमें
इस जीवन को,
जन्ममृत्यु के अनभिज्ञ चक्र की
परिधि से पार पाऊँ ।
By Aakash Deep

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