अशान्त ज़माना
By Siyasta Biswas
शहरो के शौर से परेशान हू मै,
थोड़ी ठंडी हवा खाना चाहता हू मै,
ऐक ठहराव लाना चाहता हू मै,
आजकल भीड़ मेहसूस करता हू मै हर जगह,
खाली तो मेरा रूह हे इस तरफ,
शान्त करने चला था खुदको,
शौर मिला मेरे मन मै मुझको ।
By Siyasta Biswas

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