अल्फाजो के खंजर!!
By Jagruti Parish Jadhav
हर इंसान के पास अपना एक अवजार रहता है। जिसका उपयोग वह खुद को बचाने के प्रयास मे करता है। ऐसाही एक अवजार उसके पास हमेशा रहता है। जिससे वह सामने वाले को बिना स्पर्श किए गहरे घाव दे सकता है।
वह है, "खंजर"! "अल्फाजो के खंजर"!!
अल्फाज के खंजर से कुछ अल्फाजो के फासले थे।
फासलो की इन गहराइयो ने उन अल्फाजो से बाते की।
जहापर वो सबर करना चाहते थे उस अनजाने सफर का।
सफर, जो उन्हे उनकी मंजिल दिखाने मे साहायता कर सकता था।
पर अल्फाजो के उन खंजर ने उसकी एक न सूनी, युही नही कहलाता था वो "हत्याओं का धनि"।।
उस अवजार ने दिलोपर कुछ इस कदर घाव दिए,
जहा इनपर मरहम की जरूरत थी, वही कुछ नये जख्म कुरेद दिए।
दुरीया बढने लगी थी रिश्तो मे, शायद अभी क्या ही रह गया था उन प्यार की बंदिशो मे।
वो खंजर भी भाप गए थे कि क्या ताकत थी उनके दोगले अल्फाजो की लकीरो मे।
लकीर, जो वो मिटा सकते थे, पर उनको यह रास ना आया,
जो भी था पास उनके, कुछ चालाकियों से उनको खुद से दूर कर दिया।
पर वो अल्फाज क्या शुरू से ही ऐसा खंजर था???
अल्फाज जो की कभो प्यार के लिए तरस रहे थी, किसी ने उन्हे नही अपनाया,
उन्हे पनाह दी उस नफरत ने, जिसने दो करिबीयो को अनजान बना दिया।
वो अल्फाज तो मासूम थे, पर लोगोंसे उसकी मासूमियत देखी न गयी, लोगोने उस मासूमियत को कुछ इस कदर छिन लिया..
मासूम सा लगने वाला वो अल्फाज आज एक "अल्फाज का खंजर" कहलाया।।।
By Jagruti Parish Jadhav

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