top of page

अलविदा

Nov 25, 2022
2 min read

By Amita Grover


अभी कुछ पहर पहले तक यहीं थी तुम बातें करती,

भजन सुनती ,मेरे साथ

कहाँ चली गई चुपचाप रात के अंधेरे में गुमसुम

स़ोचा होगा सबकी तकलीफ़ अब ख़त्म कर दूँ

बहुत ह़ो चुका सफर ज़िन्दगी का

हम तो पास ही थे तुम्हारे

एक आवाज़ तो दी होती माँ

सुबह तड़के बस ऐसी पक्की नींद सो गईं

एसा लग रहा था कई रात़ो से सोई नहीं थी

अब तो सांसें भी दम तोड़ चुकी है।

हम सब मिल कर भी कुछ न कर सके

आज भी आप की मर्ज़ी चली

अलविदा माँ ………

अलविदा भी न कह सके

आप आज भी हमारे ज़हन में हो

कभी एक बेटी की मुस्कुराहट मे

आकर दूसरी की आखो में झलकती

यां फिर एक की बातो मे

और याद है की जाती नही

रोज किसी न किसी बात पर ज़िक्र होता है




लगता है यही आस पास हो

कभी फ़ोन की घंटी का अहसास

या फिर रोटी के स्वाद मे

कभी सर पर रखे हाथ का अहसास

कभी् वो मुस्कुराता चेहरा

या प्यार से तकती हुई नर्म आँखे

या फिर कपड़ों से आती जानी पहचानी सी ख़ुशबू

सब कुछ यही छूट गया है आपका....

.माँ अभी त़ो आपने घर भी जाना था

गये थे आपके घर आपकी तस्वीर ले कर

पर आप ताे पहले से वहीं बिखरे थे एक एक कण मे

अपने कमरे से हम सबकाे देख रहे थे

एकटक कुछ बिनकहे

कभी तस्वीरों में ,कभी फोन पर ,

कभी कैमरा में क़ैद हो

पर वो कभी न भूलने वाले दिल में रहेगी सदा

वही मुस्कुराता सा चेहरा ,

वही आखो की रौनक

छाेटे छाेटे भी याद करते है

तुमकाे आसपास ढूँढते है

आऔर कई मासूम सवाल करते है

आज भी मुँह में वही खीर का सवाद है

आज भी बात़ो में वही सूकून छलकता है

मां तुम सदा अंग संग हो

तो अलविदा कैसा


By Amita Grover





Recent Posts

See All
Mirrored Truth

By Rufaida Manzoor I stood beside the silent lake, With eyes that felt no urge to break. My hair fell low in shadows deep, The waters...

 
 
 
My Antidote

By Anveeksha Reddy You fill my books with your ink, seeping into the pages bright and brilliant The words etched into the cracks of it,...

 
 
 
Avarice

By Anveeksha Reddy You tear my skin and pick on my bones I label it as gluttony for you Churning and shattering the remains of my...

 
 
 

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page