"अर्धांगिनी" (हमसफर)
By Sakshi Joshi
मेरे बिखरे से बेरंग जीवन में,
वो रंगों की बहार लाई!
अपना नाम मुझ संग जोड़कर,
मेरी जीवन संगिनी कहलाई!!
हाथ थाम कर मेरा,
जीवन की हर राह में मेरे साथ है!
मुझे लगी हर ठोकर का,
उसे भी एहसास है!!
मुझसे ज्यादा मेरी हर परेशानी का,
उसे आभास है!
मेरी जिंदगी जिने की,
अब वह एक वजह़ खास है!!
उसके हर कर्ज को,
अब फर्ज मानकर चुकाना है!
शायद उसकी आखरी साँस तक,
मुझे भी जीते जाना है!
मुझे भी उसका,
पूरा साथ निभाना है!!
जीवन की हर राह में हम दोनों को,
आज भी एक-दूसरे का साथ निभाना है!
हमे साथ हमारा मरने तक है गँवारा,
दुआ है ईश्वर से की हमें बस एक-दूजे का हो सहारा!
जन्नत की उस राह में भी,
मुझे मेरी जीवन संगिनी का हो साथ प्यारा !!
By Sakshi Joshi

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