अर्धांगिनी
Updated: Jun 10, 2023
By Nikhil Tandon
"उलझन में होऊं जब कभी मैं
तो तुम भी परेशां हो जाती हो,
बड़ी मासूम हो तुम
चुपके से मेरा हर दर्द बांट ले जाती हो
गुस्सा हो जाऊं गर मैं कभी
तो मुझे झट से मना लेती हो,
बड़ी चालाक हो तुम
मेरी हर ज़रूरत कहे बिना ही जान लेती हो
कह दूं कभी कुछ डांट कर
तो अपने आंसू हंसी में छुपा लेती हो,
बड़ी नादान हो तुम
ग़लती मेरी हो फ़िर भी माफ़ी तुम मांग लेती हो
हो जाऊं मैं कभी मायूस
तो मेरा हौंसला बन जाती हो,
बड़ी हिम्मती हो तुम
मेरी हर मुश्किल से लड़ जाती हो
बड़ी चुलबुल हो तुम
हर वक़्त चेहरे पर मुस्कान रखती हो,
सादगी तुम्हारी हर अदा में है
हर लिबास में बा–कमाल लगती हो
अदब है तुम्हारे हर अंदाज़ में
मेरे हर रिश्ते का ख़्याल रखती हो,
नाते में “बहू” हो इस कुटुम्ब की
मेरे मां–बाबा की मुझसे ज़्यादा परवाह करती हो
तुम बिन अधूरा हूं मैं
मुझे हर मायने में तुम ही पूरा करती हो,
मुझे फ़ख़्र है मेरी "अर्धांगिनी" हो तुम
जो हर सुख–दुःख में मेरे साथ रहती हो"
By Nikhil Tandon

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