अर्धनारी
By Swapna Jyoti
वो है खूबसूरत…
बड़े ही जतन से बनाई हुई
प्रकृति और पुरुष दोनों से मिलके सजाई हुई
कुछ मतलब समझ में आया…?
वो अर्धनारी।
हमारी और आपकी तरह उनमें भी बसती जान है
आखिर वो भी तो इंसान हैं
ऐसे मत देखिए उन्हें
बड़े ही सलीके से उन्हें बनाया गया है
हम में तो एक ही गुण है
उन्हें दो रूपों से संवारा गया है
वो अर्धनारी।
कुसूर नहीं है उनका इसमें
विडंबना ही तो है ये कि जहां हम मानते हैं अलग होना अच्छा है
और वहीं उन्हें हमने ही समाज से अलग कर रखा है
वो अर्धनारी।
लायक नहीं हैं वो
अपनी पीढ़ी आगे बढ़ा नहीं सकते
बस इतनी सी बात….
पर वात्सल्य उनमें भी होता है
कोई उन्हें चाहे
वो भी किसी पे प्यार लुटाए
ऐसे उनमें भी अरमान हैं
आखिर उनमें भी जज़्बात है
वो अर्धनारी।
हमारी और आपकी तरह ख्वाहिशें उनमें भी सांस लेती हैं
उनमें भी धड़कनें धड़कती हैं
ऐसे मुंह ना मोड़िए उनसे
उनके गुजरने पे हंसिए नहीं
भले ही आगे बढ़ा लेते हैं वो कदम
पर बुरा उन्हें भी लगता है
आंसू आंखों से उनकी भी छलकता है
वो अर्धनारी।
नज़रिए नज़रिए का ही तो फेर है
वरना एक वो रूप परमेश्वर का अर्धनारीश्वर जिसे पूजते हैं
और एक ये जो कुछ वैसा ही है पर उसे दुत्कारते हैं
वो अर्धनारी।
By Swapna Jyoti

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