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अब्की बार

Nov 11, 2022
2 min read

By Teri Kalam


देवी कह कर क्या खूब पूजा है तूने ,

अब्की बार मुझे इंसान समझ के तो देख ।


जिस जिस्म को नोचता आया है तू ,

अब्की बार उसे माँ समझ के तो देख ।


तेरे डर से सांस घुटती है मेरी ,

अब्की बार मुझे आज़ाद करके तो देख ।


चुप रहने का अब मन नहीं करता ,

अब्की बार मेरे जज़्बात सुन के तो देख ।


तेरी इज्ज़त पर बोझ नहीं हूँ मैं ,

अब्की बार तू सोच बदल के तो देख ।


कौन कहता है कि पराई हूँ मैं ,

अब्की बार अपनी समझ के तो देख ।


कब तक अकेली लड़ूँगी मैं ,

अब्की बार तू साथ देके तो देख ।


दिल में मैंने बुने थे कुछ सपने ,

अब्की बार उसे उड़ान देके तो देख ।


वो दुपट्टा हर पल करके थक चुकी हू मैं ,

अब्की बार अपनी नज़रें झुका के तो देख ।





एक माँ एक बहन एक दोस्त हू मैं ,

अब्की बार तू अपने जैसी समझ के तो देख ।


नहीं चाहिए मुझे पूजा मेरी ,

अब्की बार तू बस इज्ज़त करके तो देख ।


बाबा अगर तेरी परी हूँ मैं तो ,

अब्की बार आसमान में उड़ा के तो देख ।


“ सो किउ मंदा आखीऐ जितु जंमहि राजान॥ ”,

ये सुनता सुनाता है तू ,

अब्की बार इसे खुद मान के तो देख ।


तुझे पैदा करके दूषित कहलाईं हूँ मैं ,

अब्की बार मुझे स्वीकार करके तो देख ।


तेरे माकान को घर बनाती हूँ मैं ,

अब्की बार तू ये मान के तो देख ।


तेरी दुनिया मेरे बिन दो पल की भी नहीं ,

अब्की बार तू घमंड थमा के तो देख ।


तेरी खुशी को कम ना होने दूंगी मैं ,

अब्की बार तू मेरी खुशी समझ के तो देख ।


ना कमजोर ना बुज़दिल हूँ मैं ,

अब्की बार तू मेरे हक देके तो देख ।


एक औरत से पहले एक इंसान हूँ मैं ,

अब्की बार तू खुद इंसान बन के तो देख।


By Teri Kalam





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