अब्की बार
By Teri Kalam
देवी कह कर क्या खूब पूजा है तूने ,
अब्की बार मुझे इंसान समझ के तो देख ।
जिस जिस्म को नोचता आया है तू ,
अब्की बार उसे माँ समझ के तो देख ।
तेरे डर से सांस घुटती है मेरी ,
अब्की बार मुझे आज़ाद करके तो देख ।
चुप रहने का अब मन नहीं करता ,
अब्की बार मेरे जज़्बात सुन के तो देख ।
तेरी इज्ज़त पर बोझ नहीं हूँ मैं ,
अब्की बार तू सोच बदल के तो देख ।
कौन कहता है कि पराई हूँ मैं ,
अब्की बार अपनी समझ के तो देख ।
कब तक अकेली लड़ूँगी मैं ,
अब्की बार तू साथ देके तो देख ।
दिल में मैंने बुने थे कुछ सपने ,
अब्की बार उसे उड़ान देके तो देख ।
वो दुपट्टा हर पल करके थक चुकी हू मैं ,
अब्की बार अपनी नज़रें झुका के तो देख ।
एक माँ एक बहन एक दोस्त हू मैं ,
अब्की बार तू अपने जैसी समझ के तो देख ।
नहीं चाहिए मुझे पूजा मेरी ,
अब्की बार तू बस इज्ज़त करके तो देख ।
बाबा अगर तेरी परी हूँ मैं तो ,
अब्की बार आसमान में उड़ा के तो देख ।
“ सो किउ मंदा आखीऐ जितु जंमहि राजान॥ ”,
ये सुनता सुनाता है तू ,
अब्की बार इसे खुद मान के तो देख ।
तुझे पैदा करके दूषित कहलाईं हूँ मैं ,
अब्की बार मुझे स्वीकार करके तो देख ।
तेरे माकान को घर बनाती हूँ मैं ,
अब्की बार तू ये मान के तो देख ।
तेरी दुनिया मेरे बिन दो पल की भी नहीं ,
अब्की बार तू घमंड थमा के तो देख ।
तेरी खुशी को कम ना होने दूंगी मैं ,
अब्की बार तू मेरी खुशी समझ के तो देख ।
ना कमजोर ना बुज़दिल हूँ मैं ,
अब्की बार तू मेरे हक देके तो देख ।
एक औरत से पहले एक इंसान हूँ मैं ,
अब्की बार तू खुद इंसान बन के तो देख।
By Teri Kalam

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