अब तो आईना भी मुझे रूलाता है
By Nisha Shahi
अब तो आईना भी मुझे रूलाता है,
चिढ़ाता है और मुझसे कहता है।
कहां है तेरी बिंदिया?
हरी लाल कांच चूड़ियां कहां है ?
कहां है मांग का सिंदूर होठों की लाली कहां है
कैसी खोई खोई सी तू दिखती है
आंसुओं से भरी तेरी आंखें कैसी सूजी सूजी सी से दिखती है
कहां है तेरी वह चहचहाती मुस्कान
कहां है कहां है??
अब तो आईना भी मुझे रुलाता है चिढ़ाता है
By Nisha Shahi

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