अफसोस
By Vidhi Sharma
.. कोई नहीं है यहां मुझे , इस अंधेरे और एक पोटली को छोड़ कर ,
पोटली किस की ???
पोटली अफसोस की ...
अफसोस ,
किसी के समय से पहले जाने का ,
जाने वाले से सब कुछ न कह जाने का ,
उसके दर्द को नाटक समझने का ,
उससे बिना बात झगड़ने का,
उसकी हर बात टालने का,
उसको न संभालने का ,
उसको न समझने का,
उससे हर वक्त उलझने का ,
लोगो की सुन के अपने दिल की न सुनने का ,
"अरे अभी तो बहुत टाईम है " ऐसे सोचने का ,
केवल अफसोस .....
काश अफसोस की जगह समय होता मेरे पास ,
काश कोई बताता कि अब ज्यादा समय नहीं है उनके पास,
काश कि वो इंसान होता और हमे यह पता होता
कि समय बहुत नही है किसी के भी पास ... काश
खैर ,
अब इस अफसोस की पोटली को काश के धागे से
बांध देने के अलावा और कुछ कर भी नही सकते,
और अब जब जा ही चुका है समय तो अफसोस करके
भी कुछ बदल भी नही सकते ,
कुछ बदल भी नही सकते ।
By Vidhi Sharma

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