अपूर्ण
By Poonam Kumari
यूं ही मेरे मन में एक दिन सवाल आया
की शक्ति शरीर से है मिलती
या आत्मा के साथ होती है इसकी गिनती
शरीर ने कहा
क्या तुमने उठाया है आज तक
मेरे बिना एक भी कदम
आत्मा ने जवाब दिया
मेरे बिना नहीं लगता तुम्हारे दिए हुए
जख्मों पे मरहम
शरीर ने कहा अगर मैं ना होऊं तो
तुम्हारी गिनती भी ना हो इस समाज में
आत्मा ने फिर जवाब दिया
मैं ना होऊं तो
हर जनम में हो तुम एक अलग व्यक्ति
मैं ही हूं जो तुम्हारे हर रूप को एक बनाता हूं
मैं ही तुम्हें जीने का मकसद देता हूं
दोनो की बहस सुनकर
मन हो गया परेशान
उसे लगा
उसे ही निकालना पड़ेगा कोई समाधान
उसने दोनो से कहा
शक्ति के लिए हो तुम दोनो ही महत्वपूर्ण
पर एक दूसरे के बिना तुम दोनो ही हो अपूर्ण
तब दोनो को बात समझ में आई
आपको लग रहा होगा की इसमें भला क्या है हमारी भलाई
हमें भी लगता है हम अपने आप में ही हैं पूर्ण
पर सच तो यही है
हर कोई है एक दूसरे के बिना अपूर्ण
By Poonam Kumari

Comments