अपना जीवन
By Teri Kalam
तन टूट गया,
मन रूठ गया ।
डर बढ़ता गया,
होंसला घटता गया ।
जीवन थम गया,
लाता गम गया ।
शेरनी थी पहचान जिसकी,
आज उसने गरजना बंद किया ।
हर पल बोझ बनता गया,
नाता एक एक कर झड़ता गया ।
तब रोशनी की किरण दिखी,
कुछ पाने की चाह जगी ।
दम में दम आने लगा,
डर तब भी सताने लगा ।
मुझे आगे जाना है,
कुछ कर दिखाना है,
अपना जीवन बस अपना ही तो बनाना है ।
By Teri Kalam

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