अनुभव खुद से
By Magan Chawla
ना तकल्लुफ कर तू
यूं दूसरों को परख कर,
ना परेशां कर तू खुद को
यूं दूसरों को आजमा कर
ये ज़िदंगी है साहब,
कब खुद के साथ बीत जाए
कोई नहीं जानता,
जब बात खुद पर आ जाए
तो अपना भी नहीं पहचानता
वक्त नहीं लगता यहां बाज़ी पलटने पर,
ज़िंदा से मुर्दा बन जाता है इन्सान
सिर्फ एक आंख झपकने पर
बस यही कहता है दिल मेरा मुझसे अब,
परख कर दूसरों को तू
यूं ना इससे कुछ भी पाएगा,
हो सकता है तेरा दिल
यूं बेवजह ही घबराएगा
इसलिए बस खुद में ही खुश रहा कर
ये ज़िंदगी इक बार मिली है
शायद इक बार में नहीं,
अनुभव तो खुद की कहानी में है
दूसरों के सार में नहीं ।।
By Magan Chawla

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