अधूरा
By Ritu Singh
सपनों की कतारें
मेरे दिल की तेज धङकन
दिमाग की गपशप
मन की उलझन
कल्पनाओं का सच एक दिखावा बन गया
वो सामने होके भी अनजान हो गया
हमसे नजरें मिली तो बेवफा बन रहे
नकली मासूमियत के जाल में कारण बुन रहे
हाल ही में उनकी फितरत से मुलाकात हुई
ना चाहते हुए उनकी शख्सियत से रूबरू हुई
इच्छाओं का अधूरा रहना मुनासिब था
क्यूंकि हमारी कमज़ोरी का उनको अह्सास था
शायद उनकी निगाहें किसी अप्सरा पे होगी
तभी हमारी माफी की सरलता भी उनको चुभ गई होगी।
By Ritu Singh

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