अटूट श्रद्धा
Updated: Jun 1, 2023
By Manish Agrawal
मेरे हृदय की पीड़ा का, क्या है तुम्हे कुछ अनुमान ।
कब तुम द्रवित होगे, कब लोगे मेरा संज्ञान ।।
मेरा रोम–रोम हर क्षण, तुम्हें ही रहा है पुकार ।
कब तुम मेरी सुधि लोगे, कब आओगे मेरे द्वार ।।
तुम्हारी प्रतीक्षा करते–करते, अब तो मेरे नैन भी हारे ।
क्या तुम्हें ये बोध नहीं, मैं हूं केवल तुम्हारे सहारे ।।
कब वो पल आएगा, जब तुम होंगे मेरे सम्मुख ।
सभी दुखों का नाश होगा, और मिलेगा असीम सुख ।।
तुम तो दयानिधान हो, फिर क्यों बनते हो इतने निष्ठुर ।
कितनी और परीक्षा लोगे, क्यों बनते हो इतने चतुर ।।
महिमा तुम्हारी ज्ञात है मुझको, मैं नहीं छोडूंगा आस ।
श्रद्धा मेरी अटूट है, तुमको आना पड़ेगा मेरे पास ।।
By Manish Agrawal

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