अच्छे दिन
By Raj Modi
अच्छे दिन सफेद चित्र है जनाब
याकि तुम बुरे, याकि मैं बुरा
या फिर हैं बुरे हमारे नवाब
एकरोज की कहानी को आम बना बैठे हो
एकरोज़ लाखो दुख सड़क पे कुर्बान
एक ओर अनंत जत्था इंसानी लाशों का
कहते अनंत वायदे की जिंदगी मेहरबान
सौदा आंसुओ का है जनाब
याकि तुम बुरे, याकि मैं बुरा
या फिर हैं बुरे हमारे नवाब
और कुए के सूखे तलिए चीख चीख कर
सौ बार पुकारे मुझे दो बूंद का मोह है
दरिए से फरियाद कर बैठे इस बीच रेगिस्तान के दौर में
इस तीखी अनबन में रुपए बीस का पानी मेहरबान
पानी का मशहूर धंधा है जनाब
याकि तुम बुरे, याकि मैं बुरा
या फिर हैं बुरे हमारे नवाब
इधर उधर फेंके हुए फटे कपड़े कुछ रास्तों पे,
कुछ नालों में, कुछ रेल की पटरी पे पीसे
हम अमीरों के हाथ में उन दलितों के कपड़ो की मिट्टी है
रुपए चालीस के दूध से धो रहे है,
मंहगाई सर पे है जनाब
याकि तुम बुरे, याकि मैं बुरा
या फिर हैं बुरे हमारे नवाब
कुत्ते भौंकते है, इन्ही की तरह, बस शोर है
उनकी भावनाओं में न सुर है, हम emotional fool है
एक सहर एक साथ एक सौ चालीस करोड़ लोग बटन दबाए
की आइए जरा देखते है कौन बेहतर जोकर है, सभी जोकरों में से
हास्य खतरे में है जनाब
याकि तुम बुरे, याकि मैं बुरा
या फिर हैं बुरे हमारे नवाब
अच्छे दिन खाली, खोखला, मैला, सड़ रहा सफेद चित्र है जनाब
याकि तुम बुरे, याकि मैं बुरा
या फिर हैं बुरे हमारे नवाब
By Raj Modi

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