अकर्ता
By Karan Gagneja
काग़ज़ कलम स्याही उठा कर एक तरफ़ रख देता हूं,
अल्फ़ाज़ वो लिख देता है मैं तो बस पढ़ देता हूं !
टीवी,रेडियो,घड़ी,धड़कन सब बंद कर देता हूं,
तेरी हाज़री में कोई दखल ना हो मैं वो इंतजाम कर देता हूं !
मीर,ग़ालिब,फ़राज़,फैज बाइज्जत एक तरफ कर देता हूं,
तू जैसा है वैसा उतर सके ऐसा रंग भर देता हूं !
डर,झिझक,अकड़,गुमान एक तरफ रख देता हूं,
तेरे आने से पहले मैं सारी सफाई कर देता हूं !
By Karan Gagneja

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