अंधेरी सी रात में
Updated: Jan 12, 2023
By Priyanka J Pandya
अंधेरी सी रात में, काले ख्वाबों ने जगाया था,
दिन के उजाले में - आग में जलाया था ।।।
मेरे ही अंदर में, अंदर में वो छिपाया था,
बाहर का सन्नाटा - दिल मे बसाया था ।।।
कुछ था मुझमें , मुझमें ही जो पाया था,
बढ़कर जो माना, बस वही तो खोया था ।।।
बँधा जंजीरों में , जंजीरों में जकड़ाया था,
कोई क्या बाँधता, मैं खुद ही बंधकर आया था ।।।
रातें ये बेचैनी में, बेचैनी में रातें उलझाया था,
क्या खोजता सुकून, बेसब्री खुद ही दिलवाया था ।।।
अपनेको सितम में, सितम में डुबाया था,
जो अपना नहीं, उसे अपना मान आया था ।।।
कोसता किसे, जिसने कोसकर हराया था,
ओढ़कर रिश्ते, एहसासों को बिखराया था ।।।
बातें जो दिलमें थी, दिलमें ही बस बातें थी,
असल में जब आया, हर किस्सा पराया था ।।।
और क्या कहना, कहना क्या और है,
ठहरना है झूठ, झूठा मैं ही कहलाया था ।।।
By Priyanka J Pandya

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