अंतर्मुखी
By Megha Somani
क्यों कहते हैं कि एक झुंड में एक चिड़िया चहकती हैं, क्यों अकेले उस चिड़िया का कोई स्वर नहीं होता ।
क्यों व्यक्ति की सामाजिकता से उसके व्यक्तित्व का अर्थ उत्पादित करें ।
इंसान एक हैं तो स्वरूप अनेक क्यों रखे, हर इंसान के साथ कुछ विचित्र एवं विभिन्न स्वभाव क्यों बुने ।
हां थोड़ा कम वार्तालाप करते हैं, लोगों के साथ अति सोशल होने से डरते हैं ।
क्यों ऐसा मानते हैं लोग कि हमारे पास ज़ुबान ही नहीं, कहने को दो अंश नहीं होते । ईश्वर ने हमें भी आनन के साथ भेजा हैं, कभी हमें आज़मा के तो देखें ।
दिल में गहराई हमारे भी हैं, बस फर्क इतना हैं कि हमारी गहराई नापना असमर्थ और रहस्यमय हैं।
By Megha Somani

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