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Zindagi Ka Safar

Mar 3, 2023
1 min read

Updated: Jul 29, 2025

By Nikita Gupta


कर्म ही तो लेकर आया था, कर्म ही तू लेकर जायेगा

प्रारब्ध से बँधा है तू, फना होकर ही तू मुक्ति पायेगा।


गर दी किसी के लब पर मुस्कान, तो मुस्कान ही तू पायेगा

जो करेगा किसी की आत्मा को आघात, तो समय का पहिया तुझे भी तो रुलायेगा।


ये जीवन तेरा उधार का, साँसें तेरी उधार

उस परम पिता परमात्मा का, तू है कर्ज़दार।


क्यूँ बने तू फितरत का ग़ुलाम, उलफत के तो रंग हैं हज़ार

क्यूँ बने तू रिश्तों का मोहताज, करके तो देख कन्हैया से मीरा जैसा प्यार।


खुदा की नेहमत है, कि बनाया तुझे इनसान

बाँट किसी के दर्द को, कर खुद पर ये एहसान।


कर गुज़र कुछ जीवन में, आवारा होकर ना कर इसे बेकार

ईश्वर का बनकर आया है निमित्त तू, ना कर इस से इनकार।


जीवन मरण की यात्रा के, हम सब ही हैं मुसाफिर

फिर क्यूँ अनसुनी करें एक दूजे की पुकार, जैसे कि कोई काफ़िर।


तू अकेला चलेगा कब तक, एक दूजे का साथ तो है लाज़मी

जो थाम लेगा हाथों में हाथ, तो ज़िंदगी होगी नाजनीन।


जला चिंता की चिता को, क्यूँ सोचे खुद को लकीर का फकीर

बनकर किसी का ज़ेहनसीब, रोशन कर ले अपनी भी तकदीर।


तोड़ दे रंजिशों की जंजीरें, थाम ले मुहब्बत की डोर

चार दिन की ज़िंदगानी में, बिखेर दे मुस्कुराहट चारों ओर।


हटा मन की आँखों से कोहरा, और त्याग दे ये मैं का फितूर

ये दुनिया तो है एक शामियाना, पहचान हम का नूर।


पर्वतों से गुज़रती नदी, टेढ़ी मेढ़ी सी है ड़गर

काँटों में ही फूल खिलें, ऐसा ही होता है ज़िंदगी का सफर।


By Nikita Gupta





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