Zindagi Aur Waqt
By Kamini Kejriwal
वक्त रूका ही कहा था मेरे लिए
वह तो चल रहा था अपनी ही चाल
भाग रहा था वो तो पल ही पल
सुबह से शाम
शाम से रात
रात से दिन
हफ्ता महीना और साल
बदल रही थी ॠतुऐ भी उसके साथ
पर
हम तो रह गये थे
जैसे
खडे वही के वही
हर तारीख एहसास कराती है
जैसे तेरे वजूद का
आ मिल जा मुझसे 'ओ ' वक्त मेरे
दिलादे मुझे फिर वही लम्हे और पल
मैने तो चलना चाहा था साथ ही तेरे
पर तूही तो छोड़ गया दामन मेरा
ऐ वक्त
गुजारिश है मेरी तुझ से
आजा
फिर से एक बार मेरा बनकर
बाॅहो मे समेट कर वो तारीखे सारी,
तारीखेसारी , वोतारीखेसारी
By Kamini Kejriwal

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