Zindagi Aur Waqt
By Kamini Kejriwal
अनमोल है यह मानुष तन
और उससे भी अनमोल
वह बचपन जिसके लिए तरसे हर मन
चाहे कृष्ण हो या राम
बचपन की वो अठखेलियां
वो डगमग डगमग चलना
वह तुतला -तुतला कर बोलना
वह नन्हे नन्हे हाथों से
अपनी ओर बुलाना
मैंने भी तो चाहा था देखना वह
बचपन तेरी ही आंखों में पर
वक्त का चला कुछ ऐसा चक्र
रह गए हम इस पार
और रह गई तुम्हारी अनदेखी यादे
उस पार
कैसे लौटाओगे वह दिन और रात
वो
बीता हुआ हर क्षण और पल
क्या लगाओगे कीमत तुम इन
अनमोल पलो की
वो अपनो का लाड़ दुलार और प्यार
वो ममता भरी तारो की छाँव
वो सब था सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे
" लिए"
वो ताकती ऑखो का इंतजार
वो कांपते हाथो का आशीर्वाद
ये सारा संसार था और है तुम्हारा
पर बन ना सका ये तुम्हारा और
हमारा
बीच में आ गया ये ना खत्म होने
वालाअंधेरा
By Kamini Kejriwal

Comments