Zindagi
By Jinil Mankad
लोग तो वही लेकिन उनके अंदर के चेहरे बदल जाते हैं,
वक्त के साथ कहीं अपने भी पराए से बन जाते हैं!
जुड़ते हैं लोग एक दूसरे से केवल खुद के मतलब के लिए,
अरे! उन सिपाहियों को तो देखो जो जीते और मरते भी हैं दूसरों के लिए!
जो जैसा है वैसा कहा देखा हमने,इंसान को इंसान कहाँ रहने दिया हमने !
By Jinil Mankad

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