Zarre Zarre Par
By Tanuja Thakur
ज़र्रे ज़र्रे पर…..
ज़र्रे ज़र्रे पर
उसका नूर बरसता है..
और तुम कहते हो कि,
तुम्हें रौशनी दिखती ही नहीं..
ज़िक्र होता है जब उसका महफ़िल में जब भी,
सब्र बेसब्र हो जाता है…
और तुम कहते हो कि,
तुम हैरान भी नहीं..
उसकी महक को आब में घोल,
भिगो देते हैं मुझे जब बादल दीवाने,
रूह भी झूम जाती है बिन पिए…
और तुम होशमंद रहते हो यक़ीन नहीं…
तसव्वुर उसका दिल को जिस्म से फ़रार कर,
भेज देता है उसकी तलाश में..
और तुम जताते हो कि,
तुम्हें उसकी जुस्तजू ही नहीं..
By Tanuja Thakur

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