Zakhm
By Mridul Tiwari
तेरी आंखों में भरे वो आंसू कुछ कह रहे थे
तेरे टूटे दिल की वो हालत, उगल रहे थे तुझे
यूं देख मैं दौड़ा चला आया था
तेरे दिए हर घाव को मानो तुरंत मैंने भुलाया था तेरा उसकी बाहों में घूमना , मैंने आंखों से मिटाया था
बस यह आंसू तेरे कैसे रोकूं, मुझे यही समझ आया था
हज़ारों दफा उसका तेरा दिल तोड़ना आंखों में मेरी खून लाया था
तूने कहा वह बदल जाएगा, शायद कभी प्यार से बुलाएगा
बस यही सुन मैंने अपने हर जज़्बात को दबाया था रात भर मेरे कंधे पर तू रोकर सोई थी
मैंने कंधा ज़रा भी न हिलाया था शायद इस बार तू संभल जाए
यही उम्मीद मैंने लगाया था
सुबह होते ही वो आया,भूलाकर सारे ज़ख्म, तूने उसे उसे गले से लगाया था
क्या था मेरा वजूद, मुझे एक झटके में बताया था
लाखों जज़्बातओं का मेरे तूने गला दबाया था
फिर एक बार मेरे प्यार को तूने
कुछ इस कदर ठुकराया था।
By Mridul Tiwari

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