Ye Samajh Mujhe Nahi Aata Hai
By Tanuj Sagail
यह समझ मुझे नहीं आता है
जो दिल में आ जाये वो कह दो तो पागल, और कह दो तो घमंडी बताता है!!
ये खूबसूरत से इश्क़ को जुर्म और दहेज को प्रथा बताता है!!
इंसाफ का शोर मचाकर घरेलू हिंसा को निजी बताता है!!
खुद को आधुनिक बताकर समलैंगिक इश्क़ को बेतुका बताता है!!
ख्वाब दिखाकर पहले,
फिर पैसे की ज़रुरत समझाकर हर ख्वाब को दबाता है!!
स्त्री रूप की नवरात्रि में पूजा कर महावारी को अपवित्र बताता है!!
छेड़खानी कोई भी करे दोष कपड़ो पर ही आता है!!
रोना ज़रूरी है कहकर आंसू बहाने वाले को कमज़ोर बताता है!!
दर्द न सह पाओ तो कमज़ोर,
और सह जाओ तो अपनी उंगलियो पर नचाता है!!
पत्नी अगर पति की सेवा करे तो धर्म,
और पति सेवा करे तो उसे जोरू का गुलाम बताता है!!
यहसमाजमुझेसमझहीनहींआताहै।
By Tanuj Sagail

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