Ye Aankhein Tumhari
By Vivek Upadhyay
कभी कभी ज़िन्दगी हमें ऐसे मोड़ पे ला के खड़ा करती है जहाँ उलझनों के सिलसिले शुरू होते हैं ।
ऐसे दोराहे पे खड़े हैं दो लोग जो एक दूसरे को देख कर महसूस करते हैं की जैसे इसी मुलाकात का इंतज़ार था दोनों को ।
पर ज़िन्दगी इतनी आसान होती तो क्या था ।
दोनों मजबूर हालात के हाथों ।
पर जब होठ कुछ नहीं बोलते तब आँखें बात करती हैं ।
ये कविता उसी दृश्य का उल्लेख करती है ।
इसमें एक प्रेमी यानी की लड़की शादी शुदा होती है पर अपनी ज़िन्दगी में खुश नहीं होती जब तक वो एक दिन उससे नहीं मिलता और अपने आप को नहीं जानती ।
वो दोनों एक दूसरे को देख के और मिल के चमक उठते हैं पर अफ़सोस वो हमेशा के लिए एक दूसरे के नहीं हो सकते ।
वो लड़का अपनी प्यार करने वाली लड़की की आँखों के बारे में और इस पुरे घटना चक्र को कविता के माध्यम से कह रहा है ।
ये भावनाओं का समंदर नीचे लिख दिया गया है उम्मीद है आप लोगों को पसंद आएगा।
ये आँखें तुम्हारी तुमसे अच्छी हैं,
ये कुछ कुछ तुम से ज्यादा सच्ची हैं,
तुम देती हो जवाब अपने आप से भी छुप के मेरी बातों का,
ये बेबाक बयानी करती हैं तुम्हारे दिल के जज़्बातों का,
तुम्हारी ये आँखें तुमसे अच्छी हैं,
इनकी बातें तुमसे सची हैं,
सोचता था तुमसे पूछूं हाले-दिल्,
पर हो गयी प्यार मे थोड़ी मुश्किल,
तुमने कहा प्यार मे मुझे मिली है मंज़िल, ना देख मुझे अब ऐसे मेरे कातिल,
आँखों मे तुम्हारी जब डूबे तो जाना,
तुम्हारे प्यार का पूरा अफ़्साना,
तुम्हारी निगाहों ने किया बयान,
कितने लेके बैठी तुम आंधी तूफान,
कुछ कम्बख़त दिल कुछ रंजिशें
कुछ भूले-बिसरे बहकते अरमान,
मै भी था इन्ही राहों मे ए हमसफ़र,
हो गया तय हमारे बीच कुछ दूर का सफर,
तुमने बताया, तुमने जताया, हर अदा से इश्क फ़रमाया,
मिला दिया मुझे साहिल से क्या खुब मेरे दिल को अपनाया,
आँखों ने तेरी इससे बढ़ कर जादू जगाया,
शमाँ को परवाना, पर्वाने को शमाँ बनाया,
भटक जाऊं न अंधेरे मे फिर से कहीं ऐसा मुझमें दीप जलाया,
तेरी ख़ामोशी सुन के पल पल मरता हूँ मै,
पर तेरी आँखों को देख कर सब्र करता हूँ मै,
तुझे पता है कि तुझसे ही जमी मेरी ये महफ़िल है,
तेरी नज़रों मे ही खोया क्योंकि वहीं मेरी मंजिल है,
ये आँखें तुम्हारी तुमसे अच्छी हैं,
ये कुछ कुछ तुम से ज्यादा सच्ची हैं ।
By Vivek Upadhyay

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