Yahaan Ki Baatein
By Kiran Tekawade
यहाँ की बातें छोड़ यहीं पे,
चलो ना आगे चलते हैं..
माफी देना पागलपन है,
तो पागलपन करते हैं..
मीठी हो या कड़वी बातें,
कब तक संग रख पाओगे?
हाथ का प्याला नीचे रख दो,
वरना तुम थक जाओगे..
रोज़-रोज़ आ-आ कर सूरज
शाम को ढल ही जाता है..
ये पल मिटाके एक नया पल
अगले पल ही आता है..
अच्छी/बुरी, जैसी भी हो,
'शाम' को आखिर ढलना होगा..
देखना है गर नया सवेरा,
यहाँ से आगे चलना होगा..!
By Kiran Tekawade

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