WhatsApp V/s Khat
- Hashtag Kalakar
- Feb 28, 2023
- 2 min read
By Khushbu Sharma
संदेश व्यवहार,
आज के इस आधुनिक युग में दौर आया है, वॉट्स्ऐप का। जहाँ बातें करना तो है बहुत ही आसान , मगर क्या है वो अपनापन जो कयी वर्षों पहले खत के दौर में हुआ करता था। हैरान हूँ में ये सोचकर कितना सब्र और प्रेम होता होगा कि संदेश आने से लेकर फिर उस खत मे अपना जवाब देकर पहुचाने तक कोई बैर नही हुआ करता था। जो कि आज मात्र चंद मिनटों में रिप्लाई न मिलने पर रिश्ते टूट जाया करते हैं।।
रिश्तों की अहमियत खो सी गयी है, बस एक मेसेज से , नया साल हो या सालगिरह की बधाई दे दी जाती है। मुझे तो पंसद है खत का इंतजार जहाँ मिलने की उम्मीद हो न हो मगर स्याही और कलम से एक कोरे कागज पर दिल की वो हर बात कही हो जो, अक्सर रुबरु में नहीं कही जाती हो, पसंद है मुझे वो इंतजार जब आये वो कबूतर लेकर जवाब मेरे खत का।।
जाने-पहचानें अजनबियों से हो गये हैं अब बस एक दुसरे की खबर पुछने को "chat" का नाम दे दिया गया है। न जाने कितने ही अजनबियों से जुड़े रहने को "social media " नाम दे दिया गया है।
बुरा नहीं है ये बदलाव कयी फायदे भी है इस बदलाव के, नुकसान हुआ है तो सिर्फ अपने ही अपनों से कुछ दूर से हो गयें।।
बस खत के दौर सा इस नये दौर में भी सब्र चाहतीं हूँ, यह नहीं कहतीं में कि जरूरी नहीं है बदलाव वक़्त के साथ,
बिल्कुल जरूरी है। में कहतीं हूँ इस बदलाव के साथ खोया हुआ अपनापन, सब्र और प्रेम लौट आना ज़रूरी है।। ��
By Khushbu Sharma

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