Waqt / वक्त
Updated: Nov 18, 2022
By Vasudha Mitragotri
यह तो वक्त वक्त की बात है, यह किसीका अच्छा तो किसीका खराब है।
जनम से ही शुरू हो जाता।
इन्सान की जिंदगी से जुड जाता,
और थम जाता है सांसोंके साथ।
वक्त न होता किसीका,
न ही कोई बसमें इसे कर पाया।
हम हैं इसकी कठपुतलियां,
नाचते सब ईशारोंपर इसकी,
जब-जब जैसे यह नचाता।
कभी काटे न कटता,
कभी कट जायें पलक झपकते।
इसका पहिया न कोई रोक सका,
न ही कोई उल्टा घूमा सके।
वक्त गुजर जाये आगे आगे,
छोड खट्टी मीठी यादें।
गर बढना भी चाहो संग इसके,
यह मुसाफिर तो बढते ही जाये,
न देखे कभी वो मुडके के।
तकदीर, रिश्ते, दोस्त,
सबको बेनकाब करता है।
है सब्र इसकी परछाई,
दोनों साथ चलतें जैसे बहन भाई।
वक्त देता जख्म और मरहम,
वही देता हँसी और आँसू।
सिखा जाता फलसफें जिंदगी के,
न है यह बसमें किसीके।
गर करोगे कद्र इसकी,
भर देगा यह खुशीयोंसे झोली।
गर न कर पाओगे कद्र इसकी,
छूट जायेंगे हाथोंसे हँसीन लम्हे, मलते रह जाओगे हाथ खाली।
बदलना तो जिंदगी की जरूरत है,
बदलती तो इन्सान की फितरत है।
गर वक्त रहे हमेशा एकसा,
तो जिंदगी का नाम बोरियत है।
घड़ी तो महंगी या सस्ती,
दिखाती तो सिर्फ वक्त है।
पर बुरा वक्त दिखाता अच्छे लोग हैं।
तो गुजारो कुछ लम्हे अपनों के साथ,
क्योंकि यही निवेश, बुरे वक्त में
हमारी ताकत और पूँजी है।
By Vasudha Mitragotri

Comments