Waqt Lagta Hai Dost ,Sabr Rakh
By L .Ashwini Reddy
बीज को फसल बनने में,
शिशु को युवा बनने में ,
पेड़ पर लगे फल को पकने में
वक़्त लगता है दोस्त ,सब्र रख।
भगवान् से प्रार्थना का जवाब मिलने में ,
किसी पसंदीदा कला में निपुण होने में ,
परिश्रम का फल मीठा होता और ज़रूर मिलता है ,परन्तु
वक़्त लगता है दोस्त ,सब्र रख।
बंजर भूमि को उर्वरा बनने में ,
खेत में फसल को पकने में ,
और पके फसल को खाने योग्य बनने में ,
वक़्त लगता है दोस्त ,सब्र रख।
शिशु गिरते पड़ते चलना सीखता है ,
कोई भी अच्छी वस्तु आसानी से नहीं मिलती ,
प्रार्थना की शक्ति को झूठा मत समझ ,क्यूंकि
वक़्त लगता हे दोस्त ,सब्र रख।
By L .Ashwini Reddy

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