Waqt Ki Karwat
By Nausheen Sayyed
ये दास्तान है उस जमाने की :
जब हम नन्हे मुन्ने बच्चे थे ।
इरादों के पक्के, अक्ल के कच्चे थे ।
उस दौर में हम सब इतने सच्चे थे ।
तब के सारे मौसम भी कितने अच्छे थे ।
खेलते थे छुपाछाई, कभी पढते मजेदार कहानी।
कभी होती थी शरारतें, कभी कभी नादानी ।
सुनते थे बडो की, कभी करते अपनी मनमानी ।
बनाते कागज की कश्ती, जब बरसता था पानी ।
फिर वक्त ने ऐसी करवट ली :
और अब हम हो गये हैं बडे ।
कई मसले हैं आ के सामने खडे ।
किसी को नौकरी की है चिंता ।
कोई शादी के चक्कर में पडे ।
शरारतों की जगह अब साजिशों ने ले ली ।
दिल, जमीर और रूह भी हो गई मैली ।
अंदर तो सबके ही भरा है जहर,
फिर भी कोयल सी मीठी है बोली ।
By Nausheen Sayyed

Comments