Umr Bhar Ka Saath
By Pratiksha Singh
तुम्हारे पायल का घुंघरू बन जाऊ
कभी गजरा बन तुमको महकाऊ
चूड़ियों की खनक में भी सुनाई दे जो
मैं ऐसा मधुर संगीत बन जाऊ
जो उम्र भर साथ रहे तुम्हारे
मैं ऐसी कोई चीज़ बन जाऊ।
तुम्हारे दुपट्टे का सूती कपड़ा ही
या पश्मीना कोई शॉल सही
जिस रंग में भी सजना चाहो तुम
मैं हर एक वो रंग बन जाऊ
जो उम्र भर साथ रहे तुम्हारे
मैं ऐसी कोई चीज़ बन जाऊ।
आंखों में काजल की धार सा
चहरे पर बेपरवाह बाल सा
छू लूं तुम्हे धीमें से
और एक शरारत कर जाऊ
जो उम्र भर साथ रहे तुम्हारे
मैं ऐसी कोई चीज़ बन जाऊ।
पुराना कोई गीत जैसे यादें छोड़ जाता है
अंधेरे की बाहों में जैसे रौशनी को आराम मिल जाता है
जो पल में सुकून दे जाए तुम्हे
ऐसा कोई लम्हा बन जाऊ
जो उम्र भर साथ रहे तुम्हारे
मैं ऐसी कोई चीज़ बन जाऊ।
अनगिनत सपने जो तुम्हारी आंखें देखा करती है
जब भी सहम जाती हो तुम पलके भीगा करती है
जिससे कहना चाहो हर किस्सा तुम
वो खुशनसीब किताब बन जाऊ
जो उम्र भर साथ रहे तुम्हारे
मैं ऐसी कोई चीज़ बन जाऊ।
By Pratiksha Singh

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