Ulfaton Ki Giraft Mein
By Rajesh Kumar Routray
उल्फतों की गिरफ्त में आकर तो देखिये,
उनके चौखट पे आप जाकर तो देखिये,
मुर्दे भी क़ायल हैं उनके हुस्न के
आप जीते जी उनसे नज़रें मिलाकर तो देखिये ...
बेशक लौटते हैं कई प्यासे उसके इश्क़ के समंदर से,
आप भी मुसाफिर हैं, अपनी अर्ज़ी उन तक लेकर तो देखिये
न रखना रंज़ अगर ख्वाहिश अधूरी रह जाए,
आप काफी बाद आये हैं , सामने लगी क़तार तो देखिये
कट मरे बहुत उसकी एक झलक के लिए,
अगर शक़ है अपनी क़ाबिलीयत पे, आप अपना रास्ता देखिये
सारे नायब किस्म के तोहफे आते हैं उसकी खिदमत में,
आप क्या ही लाओगे पहले अपनी हैसियत तो देखिये
अगर मेरे बातों से दिल को ठेस पहुंची है मेरे दोस्त,
तो गुस्ताखी माफ़, मगर आप हकीकत तो देखिये
अब काफी वक़्त हो चला है , मुझे निकलना पड़ेगा ,
'मुन्तज़िर' ख्वाब देखना बुरा नहीं है, मगर किस क़ीमत पर ये तो देखिये .
By Rajesh Kumar Routray

Comments