Udne Do Mujhe
By Damini Akhilesh Dubey
उड़ने दो मुझे,
मैं उड़ना चाहती हूँ।
मुझमें हिम्मत है लड़ने की
पर अपनों का विरोध कैसे करूँ?
मैं सम्मान करती हूँ बड़ों का
पर सपनों का विरोध कैसे करूँ?
बढ़ने दो मुझे,
मैं बढ़ना चाहती हूँ।
बाँधो मत मुझे,
संस्कारों की बेड़ियों से।
चली आ रही ये प्रथा
पुरखों की पीढ़ियों से।
लड़ने दो मुझे,
मैं लड़ना चाहती हूँ।
हुनर मुझमें भी है,
नाम कमाने का।
मुँह बंद कर सकती हूँ
मैं भी ज़माने का।
वो करने दो मुझे
जो मैं करना चाहती हूँ।
बस अब उड़ने दो मुझे,
मैंउड़नाचाहतीहूँ।
By Damini Akhilesh Dubey

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