Udaan
By Jaspreet Kaur
कभी दिल करे उड़ने का
तो उड़ जाना
अपने विश्वास के पंखों से तुम
उड़ जाना
लोग दबाएंगे कुचलना भी चाहेंगे
पर सबको पीछे छोड़
बस तुम उड़ जाना
सब छोड़ोगी तो मुकाम पाओगी
सामाज की धारणा से तुम फुर्सत पाओगी
कहेंगे सब क्या करोगी कहां जाओगी
अकेली हो तुम तो क्या ही पाओगी
बेमतलब की बातें हैं ये
ज़ुबान मिल गई जिन्हें
बेमतलब ही रहने दो
बेनाम ही रखना इन्हें
कोई सुनता नहीं तो मुरझाना मत
बेवजह दुःख तुम लुभाना मत
ख़ुद को सुनो ख़ुद को सुनाओ
कुदरत को ही बस ख़ास बनाओ
कहेंगे सब तुम ये करो तुम वो करो
क्या कर रही हो
इसपर सामाज क्या कहेगा
तुम ये ना करो
पर मैं कहूंगी
जो तुम दिल से चाहो वो करो
कब तक सहोगी तुम सबके ताने
तुम्हारे दिल की यहां कौन है जाने
ख़ुद को बनाओ ख़ुद ही चमको
निखरेगा सब
बस तुम ख़ुद में दमको
जब पिता ब्रह्माण्ड और प्रकृति मां हो
कौन कहता है तुम अकेली यहां हो
इन दोनों की तुम नायाब हो बेटी
इनायतों ने खोली है
तुम्हारी खुशियों की पेटी
कभी दिल करे उड़ने का
तो उड़ जाना
अपने विश्वास के पंखों से तुम उड़ जाना
लोग दबाएंगे कुचलना भी चाहेंगे
पर सबको पीछे छोड़
बस तुम उड़ जाना
By Jaspreet Kaur

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