Tumhari Raah.
By Shivangi Pandey
तुम रॉबर्ट फ्रॉस्ट की उस कविता के उस दूसरे रास्ते जैसे हो
मैं हमेशा अपने कदम तुम्हारे ओर ही बढ़ाना चाहूंगी
भले ही ये कदम मुझे मंज़िल तक न पहुंचा पाएं,
पर इन क़दमों के पास तुम्हारा साथ तो होगा
भले ही मुझे लोग कुछ अलग न करने की सलाह दें
पर कुछ अलग कर मैं खुद को तुमसे तो जोड़ पाऊँगी
भले ही मैं डर से रखूँ अपने हर एक कदम
पर मैं इन हर एक कदम को तुम्हारी तरफ तो बढ़ाउंगी
और बस तुम ही काफ़ी हो मुझे तुम्हारी राह पर चलने के लिए
और कुछ की तम्मन्ना मुझे अब रही ही कहाँ!
By Shivangi Pandey

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