Tum Tum Ho
By Shivangi Pandey
बदलते मौसम के जैसे हो तुम
अचानक प्यार की झीनी सी बारिश कर फिर से धूप ले आना कोई तुमसे सीखे
कोई तुमसे सीखे सुबह के सूरज जैसी लालिमा मेरे चेहरे पर बिखेर रात के अंधेरे जैसे विचार मेरे मन में छोड़ जाना
सीखे कोई तुमसे भोर के चिड़ियों सी चहचहाहट मेरे दैनिक जीवन में भर उसे शाम के सूनेपन जैसा कर जाना
पर कैसे सीखे कोई तुमसे उसी बेमौसम बारिश जैसे आ मेरे मन को शीतल कर जाना
कैसे सीखे कोई तुमसे चाँद की पूर्णिमा बन मेरे जीवन को रोशन कर जाना
सीखे कैसे कोई तुमसे मात्र कुछ शब्द बोल मेरे अंतरमन में संगीत सा तरंग छोड़ जाना
क्योंकि तुम तुम हो
By Shivangi Pandey

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