Tera Ishq
By Mridul Tiwari
कुछ लिखा है तेरे लिए
कुछ तेरे लिए सजाया है
बेशक तूने मुझे कभी ना अपनाया है
पर इस दिल ने टूट कर भी हाथ ने साथ छूट कर भी
तुझे ना ठुकराया है
याद हैं वो रातें जो मैंने तेरे संग बिताई थीं
याद हैं वो शामें में जब तुम मेरा हाथ थामी थी
हीरा-जवाहरात आज मेरी औकात नहीं
ये नज़्में ही मेरे पास आज हैं
तेरी एक तवज्जो के लिए तरस रहा हूं पढ़ ले लिखा कुछ खास है
चित्रकार नहीं हूं मैं पर मैंने तेरे लिए रंगों से कुछ बनाया है
ज़रा सा देख ले एक दफा
कुछ लिखा है तेरे लिए
कुछ तेरे लिए सजाया है
इस टूटे दिल ने तेरे लिए नज़्में ही गुनगुनाया है ।
By Mridul Tiwari

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