Teej Tyohar
By Samira Gupta
वाह रे, ये तीज–त्यौहार हमारे
हाय रे, ये तीज–त्यौहार हमारे
कभी वाह रे तो कभी हाय रे...
यूंँ तो लाते हैं मस्ती और खुशियांँ अपने संग
पर कभी, यही बन जाते हैं उदासियों का सबब
यूंँ तो लाते हैं सजने संवरने के बहाने अपने संग पर कभी, यही बन जाते हैं आईने से मुंँह मोड़ने का सबब
यूंँ तो लाते हैं पकवानों की भीनी सुगंध अपने संग
पर कभी, यही बन जाते हैं बेस्वादी का सबब
यूंँ तो लाते हैं मेले तमाशों की रौनक अपने संग
पर कभी, यही बन जाते हैं लोगों से कतराने का सबब
बगिया महकी तो वाह रे
डाल से गिरी गर पाती तो हाय रे...
चाहे हो वाह रे चाहे हो हाय रे
ये हैं हमारी संस्कृति की पहचान
इनसे ही है हमारी आन बान और शान
इनसे ही है हमारी आन बान और शान...
By Samira Gupta

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