Tapas
By Dharmendra Bharti
मुझे खुद में मिला ले।
ए खुदा इतना रहम कर मुझ पर,
या तो मुझे मुझसे मिला दे,
या फिर मुझे खुद में मिला ले।
बेचैन है दिल राहत दिला दें,
भटका हूं मैं राह मिला दे,
या फिर मुझे खुद में मिला ले।
मेरे ख्वाबों को साकार बना दे,
मेरे सपनों को तू पंख लगा दे,
या फिर मुझे खुद में मिला ले।
मेरी राहों से तु रोड़े हटा दे,
मुश्किलों का मुझको हल बता दे ,
या फिर मुझे खुद में मिला ले।
अंधेरा बहोत है अंदर मेरे,
तु इसमें कोई किरण मिल दे,
राहे मेरी ख़त्म हो रही ,
मुझको कोई राह दिखा दे,
या फिर मुझे खुद में मिला ले।
तरसे मेरे नैना कबसे,
इनको थोड़ा सुकून दिखा दे,
हारी हुइ इस जिंदगी को
हौसलों की उड़ान दिला दें,
या फिर मुझे खुद में मिला ले।
मैं ये नहीं कहती राह को आसान बना दे,
पर मंजिल तक मेरा साथ तो निभा दे,
या फिर मुझे खुद में मिला ले।
मेरी कश्ती को तु किनारे लगा दे ,
या इन तूफानों को ही साहिल बना दे,
या फिर मुझे खुद में मिला ले।
मेरे मोला मेरा होसला जगा दे,
या मेरी देह को तू मिट्टी बना दे।
ए खुदा मेरे मुझे इंसान बना दे,
थोड़ी बहोत इंसानियत सिखा दे,
यातोमुझेमुझसेमिलादे, याफिरमुझेखुदमेंमिलाले।
By Dharmendra Bharti

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