Tamaam
By Kiran Tekawade
तमाम आँसू इकट्ठा होकर आँख में बैठे थे
पहले कौन कहेगा इसी ताक में बैठे थे
तुमने हिम्मत कर के पूछा, 'आज कुछ कहोगे नहीं?'
एक अजीब सी मुस्कान जवाब में निकली
'लगता है आज कुछ तय कर के आए हो?'
वापस वही अजीब सी मुस्कान
फिर न मैंने कुछ कहा न तुमने
आँखों की बात नहीं करते
कुछ अनकहा समझकर
दोनों बदन अपने आप उठ खड़े हुए
फिर एक आखरी लिपट और एक अजीब सी मुस्कान के बाद क्या हुआ?
कुछ ठीक से याद नहीं
शायद तुम मुँह फेर के चल पड़ी थी
ऐसा लगा कि कुछ बाकी रहा है
तुम जा तो रही थी लेकिन
तुम्हारे कदम हमेशा से कुछ धीमे से लगे
और मैं भी न जाने कितनी देर खड़ा रहा वहीं पर
तुम को था इंतज़ार कि मैं रोकूँगा..
और मुझ को था यकीन कि तुम पलटोगी..!
By Kiran Tekawade

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