"Sweetie"
Updated: Jun 1, 2023
By Vandana Aasif
एक घर में रहती थी मैं, एक परी
अपने साथ ही लेकर आई थी मैं अपना नाम स्वीटी
'आशिर' थोड़ा सम्मान से रखता था
'कोयो' भी उसे देखकर ऐसा ही सीखता था
पर 'आशना',उसके लिए तो मैं थी एकदम फनटूश
स्वीटी, स्वीटाश,कभी बुलाती मुझे स्वनटूश
सभी की लाडली,रॉयल,नवाबी एकदम Hifi
फालतू barking मेरा काम न था
कोई कुत्ता करीब आ पाए ऐसा आम न था
डर के रहते थे सभी मुझसे ये कहना ठीक नहीं
हां ! रानी की तरह सम्मान देते थे यही है सही
जमीन पर बैठना मुझे पसंद न था
सबके दिलों का दरवाज़ा मेरे लिए कभी बंद न था
काटना क्या होता है मैने जाना नही
अपने आप को कुत्ता मैने माना नही
12 साल हो गए है रहते हुए इस दुनिया में
'पापा'को अब भी बच्ची नजर आती है इस'मुनिया' में
बस जाने की बेला है कभी कभी ऐसा लगता है
बीमार होतो'उम्र का खेला है' ऐसा डॉक्टर कहता है
चली तो जाऊं पर सबका इतना लाड दुलार है
डराती तो हूं 'कोयो' को पर उससे भी बहुत प्यार है
आज '10जनवरी21',दवाएं, ड्रिप सभी लगी है
सभी घरवालो की आंखों में आसुओ की झड़ी है
'अजय'बड़ा स्ट्रॉन्ग बनता है,कहता है'स्वीटी' को कुछ न होगा
पर हालत देखकर मेरी,दोस्त के घर चला गया सामने खुद न होगा
जानती हूं 'मां', मैं और न झेल पाऊंगी
वापस इस घर में ,गलियों में,खेल न पाऊंगी
तुम्हारी जिंदगी में, यादों में,सदा रहूंगी
फिर परी बन हवाओ में उडूंगी
9 30 बज गए है रात के,अब अंतिम सांस लेती हूं
इंटरनेट खोल के देखना मैं सचमुच 'दर्शन' देती हूं
By Vandana Aasif

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