Suna Hai
By KIran Tekawade
सुना है वहाँ तेरे चाहनेवाले रहते हैं..
इन धुंदली, दुधिया किरणों से लबालब
आसमानी नदियों के पार
कोई नूर की बूँद है जो बहती रहती है
तमाम इन्सानी मायनों के परे..
न तो कोई पैकर है, ना ही कोई दायरा
इक नूर की बूँद है जो बहती रहती है
एक मीठी-सी खामोशी पलती है वहाँ
आँखों से आँखे बोला करती है..
सुना है, कुछ और सुना नहीं जाता वहाँ
सबकुछ कहने के पार हो जैसे
कहा तो सबकी हार हो जैसे
आवाज़ मना करती है
अल्फ़ाज़ मना करते हैं
जहाँ मौसिकी मौन हो जाती है
जहाँ शायरी दम तोड़ देती है
है ऐसी एक जगह..
खूबसूरती और सादगी के दरमियाँ..
सुनाहै, वहाँतेरेचाहनेवालेरहतेहैं..!!
By KIran Tekawade

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