Spirit of Anthem
- Hashtag Kalakar
- Dec 11, 2025
- 14 min read
By Asha Jaisinghani
रजिया बाजार से सब्जी का थैला लेकर लौट रही थी और काफी थकी हुई लग रही थी दो सैनिकों की नजर पड़ती है वो दौड़कर आतें है ।(एक हिन्दू है) थैला लेते हुए ,लगता है आपकी तबीयत खराब है किसी को साथ लेकर निकलना था ,रजिया मेरा एक बेटा स्कूल गया हुआ है और एक नौकरी पर और सामान खत्म हो गया था इसलिए निकल पड़ी ,सैनिक लाइए मै लेकर चलता हूँ। रजिया सैनिक से तुम रातभर पहरा देते हो हमको तुम्हारी खिदमत करनी चाहिए ना कि तुम्हें जाति काम करायें ।थके हुए तो तुम हो ।तीनों मुस्कुराते है। सैनिक इसलिए तो आपके साथ चल रहे है आप कहवा(चाय)पिलाना फिर हमा यरी थकान छू मंतर ,रजिया हाँ -हाँ क्ँयू नही रजिया के घर आकर तीनों कहवा पिते और सैनिक विदा होते है तो एक सैनिक उसे "जय हिन्द"बोलता है ।दूसरा वाला पहले सैनिक को अरे !क्या बोल रहे हो वो मुस्लिम है फिर माफ करना चची जान।रजिया तुम इतनी डंड और गर्मी में हमारी सुरक्षा करते हो क्ँयू? ,क्ँयूकि हम हिन्दुस्तानी है ,ना कि इसिलए सुरक्षा करते हो कि हम मुस्लिम है। रजिया - बच्चे तुम नयें आये लगते हो ,पूरे इलाके कोई भी सैनिक किसी के घर के सामने से जाकर कहवा(चाय)और खाना बोल दे कोई उन्हें मना नही कर सकता वो भी बिना पैसे के (सैनिक हैरान होता है)तुम हमारा खियाल रखते हों हमारा भी करम बनता है।
"अपनी धरती अपने लोग
कहती थी दुनिया ,इसको
धरती का स्वर्ग
आओ मिलकर ले शपथ
फिर से स्वर्ग बनाएंगे'
,"जय हिंद। सैनिक जय हिंद और चले जाते है।
स्कूल में
फहराके तिरंगा ,लहराके तिंरगा
जय गान करे हम
झंडा ऊँचा रहे हमारा
जय भारती जय भारती.. जय भारती
ना रंगभेद ना ,ना कोई भाषा
एक देश है एक विधान
हम सब मिलकर बोले
हम है हिंदुतानी हम हिंन्दुस्तानी
है प्रांत मेरा बंगाल तो क्या
है प्रांत मेरा बिहार है तो क्या
है मात्रभूमि सबकी एक
बोलो जय भारती ,जय भारती
ये मात्रभूमि अपनी ,अपने सारे लोग
क्या कर लेंगे ,अपनों का खून बहाके
है, हम सब भाई भाई
जय भारती ,जय भारती..जय भारती
फहराके तिरंगा लहराके तिरंगा --------
हैलौ हैलौ
हैलौ हैलौ कौन हो आवाज नहीं आ रही
हैलौ हैलौ तुम रजिया हो
रजिया कौन हो मैने आपको नहीं पहचाना! ? फिर रजिया फैजल (अपने बड़े बेटे )जाने कौन है रजिया रजिया बोल रहा था ?
फैजल - आवाज पहचान में नही आ रही हैं तो फोन रख दो कोई और रजिया होगीं और रजिया फोन रख देती है ।
फिर फोन की घंटी बजने लगती है फैजल फोन उठाने वाला था फिर रुक जाता है अम्मी आप ही उठाओ क्या पता किसी पड़ौसी ने किसी को अपना नंबर दे रखा हो और रजिया फोन उठाती है ,हैलौ हैलौ तुम रजिया हो ना मै तुम्हारा भाई गुल्फाम बोल रहा हूँ गुल्फाम तुम्हारा भाई पाकिस्तान से !
रजिया नाम सुनकर एक पल के लिए ठिठक जाती है ,मुँह से बोल नहीं फूटते है! तभी गुल्फाम क्या हुआ रजिया तुम्हारा भाई रजिया (आवाज गले में अटक जाती है ।
रजिया -तू गुल्फाम है !पाकिस्तान से !
गुल्फाम - ,हाँ भई तेरा भाई गुल्फाम ,बहुत दिनों से तेरे बारे में पता कर रहा था आज मालुम पड़ा ,तुम्हें फोन लगा डाला ,आदाब आपी
रजिया -वालिककुम सलाम।
गुल्फाम - दौनों मुल्कों में आना जाना चालू हो गया है ,मै कल ही गुलमर्ग (कश्मीर)पँहुच रहा हूँ बाकी बातें कल मिलकर करतें है
रजिया - खुश होकर
खुदा आफि़ज ,फोन रखकर अपने दोनो बेटो को गुल्फाम के बारे में बताती हैं ।कि मै तुम्हारे अब्बाजान के साथ हिंदुस्तान चली आई ,मेरे भाईजान ,अम्मी और अब्बू वहीं रह गये ,तुम्हारे अब्ब् कई दफा कहते बच्चों के साथ जाकर मिल आओ ,पर वँहा के हालात हमेशा ऐसें ही रहे ,जाँऊ तो कही उनकी ?(मौत की खबर) ठण्डी सासं लेते हुए ।
अगले दिन रजिया बहुत खुश थी अपने पूरे घर को सजाती है ।और तरह तरह के पकवान बनाती है एक अरसे बाद भाई से जो मुलाकात होने वाली हैं, फैजल मालाएं लेकर आता है ,तीनो स्टेशन जाकर उसका स्वागत करते है , दौनों एकदूसरे से गले लगकर खूब आँसू बहाते है ,आपा अब रोने के दिन खत्म अब खुशियों के दिन आये है ।
रजिया -अरे पगले! ये तो खुशी के आँसूं है मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा !और उसे घर लेकर आते है ।
घर पर चाभाभीजानय नाश्ता चल। रहा था ।
रजिया - और बता और बच्चों के बारे में
गुलफाम - काहे की भाभी काहे के बच्चे अपुन तो कुँवारे है जैसे अब्बू, अम्मी और तू छोड़ गये एकदम अकेला ,और अकेले से ही दिल लगता है बीवी ,बच्चों की मगममारी ना बाबा ना।
रजिया - हमनें तुझे कँहा अकेला छोड़ा ,अकेली तो मै यँहा आयी अपने "खसम "के साथ ,फिर तो माहोल बिगड़ता ही गया और सब ,बस तरस के रह गये और लम्बी सांस लेती है। और तू बता वँहा क्या करता है ? तू अभी भी वँही रहता है कि और कहीं घर ले लिया।
गुलफाम - तुझे तो याद होगा अपना घर ,अब्बा और अम्मी को अपने घर और मुल्क से कितनी मोहब्बत थी ,सो उनके इंतकाल के बाद घर और मैं वतनपरस्ती कर रहे है ।
रजिया - तू सेना में है?
गुलफाम - हाँ (खुश होकर)
रजिया - इस मामलात में तू बिल्कुल अब्बू पे गया है।उनपर भी जैसे वतनपरस्ती का जुनून था ,वही तुझमें देख रही हूँ ।और फिर गुलफाम अपने मोबाइल में अपना पुश्तैनी घर दिखाता है ,रजिया की आँखों में आँसू आ जाते है ,या अल्लाह।
रजिया -हाफिज(रजिया का पति)एक दिन उनके दोस्त ने पंजाब छोड़ कश्मीर चलने को कहा वहां उसके चचा के सेब के बागिचे थे और अच्छी तंन्खाह मिलेगी उसके साथ हो लिए माहोल ऐसा बिना किसी को पता दिए चले आये ।
तभी पडौ़स से अंजना आती है और गुल्फाम को नमस्ते कहती है ,रजिया गुल्फाम से उसका परिचय कराती है ।गुल्फाम कोई जवाब नहीं देता ,तब अंजना ,रजिया को ईशारा करके कोई बात नही कहती है और सब्जी का डोंगा रखकर कहती रजिया तुम्मारे भाईजान के लिए लेकर आईं हूँ।
अहमद (रजिया का छोटा बेटा)सिर्फ मामूजान के लिए हम क्या उनको देखदेख कर पेट भरेगें।
अंजना -(हँसते हुए)आज तक कभी ऐसा हुआ है सोया सब्जी बनाई हो और तुम्हें ना भिजवाई हो ।अंश खाने से पहले पूछता है अहमद को सब्जी दे आई ,हाँ बोलती हूँ तब खाता है और चली जाती है।
रजिया -( गुलफाम से )ये मेरा बड़ा बेटा फैजल नौकरी करता है ,और छोटा अभी पढाई करता है छोटा है इसलिए जरा शरारती है पर कहता है सेना में जाँउगा वतनपरस्ती कँरुगा और हँसती है ।
गुलफाम -तुम सब के सब मेरे साध चलो ,मैं दोनों को सेना में भर्ती करवा दूँगा ,वँहा मेरी बड़ी पूछ -परख है ,मेरा मतलब है मै वँहा बड़े ओहदे पर हूँ ।रजिया -ना रे ना अब इस उमर में ये गलियां ना छूटे ,अब तो यँही जीना ,यँही मरना । अपना मुल्क अपनी तहजीब ,ये ठहरा कोरा हिंदुओं का देश ,यँहा कितना खुलापन है ,हमारा मजहब इसकी इजाजत नहीं देता ।और तुने उससे सब्जी क्यू ली?
तीनो हैरान हो जाते है,फिर रजिया अरे काहे का जुल्म ,देखो तुम्हारे लिए लजीज सबजी बनाके लाई है ,खाओगे तो उँगलीयाँ चाटते रह जाओगे । सब खाना खाते हैं ।
रजिया -ये सब्जी खाइये ना इतनी लल्जतदार ,पर गुल्फाम बात पंसद नहीं आती है और बात पलटते हुए तीनों के तोहफे निकालता है ,बच्चे खुश हो जाते है ।रजिया इसकी क्या जरुरत है।
अहमद खुश होकर कितनी अच्छी गैंदे लाये है ।कितनी मँहगी गैंद है और क्या कमाल की है अब देखना कैसै मैं रोज किर्केट में छक्के लगाता हूँ ।सबको हंसी आ जाती है ।अहमद जल्दी -जल्दी खाना खाता सबको हँसी आती है ।रजिया -लो अब आधा-अधुरा खाना खाकर भागेगा फिर थोड़ी देर बाद बोलेगा भूख लगी,भूख लगी। अहमद-अम्मी बची हुई सब्जी रख देना बाद आकर खा लूँगा और बाहर भागता हुआ दोस्तों को आवाज लगाता है। थोड़ी देर बाद बाहर बच्चों में झगड़े की आवाज़ आती है रजिया उठ रही थी ,मै जाकर देखती हूँ कहीं किसी को चोट न लग जाये ।गुलफाम आपा तुम बैठो में देखता हूँ ,जब तक आदमी बच्चों को ना डाटें , बच्चे कँहा सुनने वाले और गुलफाम बाहर जाता है । बाहर आकर मामू देखते है कि बच्चे गैंद के लिए गुथम गुथ्था हो रहे उस बाँल के लिए लड़ रहे थे जो गुलफाम अपने भांजे के लिए लाए थे ये देखते गुलफाम अंश से बाँल छीन कर अहमद को दे देते है और अंश को मारने लगते है कि तुम हिंदू लोग हमेसा हमसें हर चीज लेते हो तुम हिंदुओं को तो बम से उड़ा देना चाहिए और अंश मार खाते हुए बोलता रहता है कि ये बाँल मेरी है मैंने जीती है मेरी हे गुलफाम अब अंश को लातों से मारे रहा था ये बाँल मैं पाकिस्तान से अहमद के लिये लाया था ।तुम हिंदू लोग हमसे हर चीज छीनने में लगे तुम हिंदुओं को तो ......तभी रजिया आती है सब सुन लेती है कहती है ये क्या कर रहे हो भाईजान , हटो यँहा से और बाँल ले लेती है और फिर समीर को बुलाती और पूछती है ये दोनो क्ँयू झगड़ रहे थे तब समीर बताता है कि इन दोनो में शर्त लगी थी कि जो किर्केट में जीतेगा उसको ईनाम में गैंद मिलेगी रजिया गैंद, अंश को बाँल देती है क्योंकि अंश जीता था तभी अहमद गैंद लेकर भाग जाता है और कहता है गैंद मेरी मैं किसी को नहीं दूंगा रजिया और अंजना दोनों अंश को समझाकर चुप कराती है और सब बच्चों को कहती है कि जब तक अहमद, अंश को गैंद नही दे देता तबतक कोई अहमद के साथ नही खेलेगा और घर आकर गुलफाम को फटकार लगाती है और कहती है ये क्या भाईजान आप हर वक्त हर बात को हिंदू मुसलमान के झगड़े बना देते हो हम बच्चों में इंसानी प्यार भरने की कोशिश करते है और आप हिंदू मुस्लिम ,हिन्दुस्तान ,पाकिस्तान का झगड़ा बना देते हो । आपके अंदर नफरत भरी हुई है।
फैजल -अच्छा अम्मी मै त़ चला सोने ,सुबह काम पर जाना है ।अहमद चल तू भी सो जा कल कालेज जाना है। मेरे कमरे में मामू रहेगें।और दोनों सोने चले जाते है।
गुलफाम -(रजिया से)ये तुने अचछा किया ,मेरा इतना सारा सामान आराम से आ जाएगा ,और मै देरसवेर उठने वाला मौजी ,अहमद की पढाई का हरजाना भी नहीं होगा, फिर मै बहुत थका हुआ हूँ बाकि बातें कल करेंगें खुदाआफि़ज।रजिया -खुदाआफि़ज भाईजान।
गुलफाम सबके सोने के बाद अपना खोलता है और अपने अपने आका को पँहुचने की खबर देता है ।और सो जाता है ।
अगली सुबह रजिया गुलफाम के कमरे जाकर सलाम कहती है,गुलफाम हड़बड़ाकर उठकर बाहर ले आया कि कमरे की बाहर खुली हवा में एक साथ चाय पिते है,चाय पीकर गुलफाम बोलता है ,रजिया मुझे अच्छा नहीं लग रहा ,तू सारा दिन करतीं रहती है ,पर बार-बार मुझे पूछने के लिए कमरे तक आना पड़ता है ,मुझे आवाज लगा लिया कर ।
रजिया -कैसी बात करते हो भाईजान (हैरान होकर)तू मेरा भाई है मेरा फर्ज बनता है,तेरी खिदमत करना ।
गुलफाम -वही तो मै तेरा भाई ,तक्कलुफ मत किया कर ,कोई काम हो तो मुझे आवाज लगा लिया कर और मेरी वजह से बच्चों को परेशान करने की जरुरत नहीं है वो दोनों अपने कामों में मशरूफ रहते है ।मै अपने काम से आया हूँ ,तेरा काम बढ़ाने के लिए नहीं ,जिस दिन मेरा काम हो जाएगा मैं चला जाँउगा फिर संभलकर अपनी आपा से भी मिलने आया हूँ ,तू नहीँ जानती तेरा पता मालुम करने के लिए कितनी मशक्कत करनी पड़ी है।
रजिया (नाराज होकर)आज ही आए हो और आज ही जाने की बात कर रहे हो ,अभी तो बहुत सी बातें करनी है मै तुम्हें इतनी जल्दी जाने नहीँ दूँगी ,मै कहती तुम हमेशा के लिए यही रूक जाओ। गुलफाम - अरे नही अम्मी -अब्बू की आखिरी ख्वाहिश थी अपनी पूरी उमर वतन के नाम कँरू, सो मुझे जाना पड़ेगा। (हँसते हुए)तू फिकर न कर अभी इतनी जल्दी भी में जानेवाला नहीं तेरी सारी मुराद पूरी कँरुगा।अच्छा मुझे काम से जाना है ,तू भी कहीं घूम फिरके आजा सारा दिन घर और घर के काम में उलझी रहती है ,मन अच्छा हो जाएगा।
रजिया -(हैरान होकर )तुझे भला यँहा(हिंदुस्तान )में क्या काम ,मुझे तो लगा था कि तू मुझसे ही मिलने आया
गुलफाम- मिलने तो मै तुझ से ही मिलने आया हूँ साथ में सरकारी काम भी लाया हूँ ,नहीँ तो तन्ख्वाह कटती ।
रजिया -ठीक है ,तू भी काम कर आ ,मै भी पड़ौसन शिब्बो के घर हो आती हूँ बहुत दिनों से कह रही थी ।और ताला लगाती है।
गुलफाम - ऐसा कर ताले की चाबी मुझे दे जा अगर में जल्दी आ गया तो ,तुझे कँहा ढुँढता फिरुँगा ।
रजिया चाबी गुलफाम को देकर शिब्बो के घर चली जाती है ,और उसके जाते ही गुलफाम अंदर जाकर अपने आका से बात करता है कि काम हो जाएगा आप निश्चित रहिये और जैसे ही रजिया की आहट सुनता है सब बंद करके बाहर आ जात है।
रजिया -अरे! तू तो मुझसे पहले आ गया ,बातों में पता ही नहीं चला कि कितना टाइम हो गया।
गुलफाम - कोई बात नहीं, पर बड़ी खुश लग रही है, अब रोज शाम को।निकल जाया कर कभी टहलने कभी किसी से मिलना ,मन तंदुरुस्त तो तन तंदुरुस्त फिर दोनों हँसते हुए अंदर जाते है ।
अब रोज का नियम बन गया रजिया के जाते ही गुलफाम अपने काम में लग जाता ,एक दिन अहमद दौड़ता -आँफता घर आया उसने बताया आज सैनिकों ने आठ लड़को बंदूक की गोली से मार गिराया ,वो लड़के सीमा पार से आये थे,सैनिकों ने रुकने को कहा तो लगे गोलियां बरसानें, सैनिकों ने डेर कर दिया ,अम्मी जब मै फौज में जाँउगा देखना उस पार से किसी घुसने नहीं दूँगा , (गुलफाम का चेहरा तमतमा जाता है )अहक्षद -फिर मामू आपके लिए नहीँ कह रहा हूँ आप तो मेरे मामू हो ,पर जो इस तरफ आँख करेगा ,उसकी आंख फोड़ डाँलूगा।
पर गुलफाम का चेहरा तमतमा हुआ था (गुस्से को काबू करते हुए) हिंदुस्तानी हमेशा ऐसा करते है ,उनका बस चले तो मुसलमानों का नामोनिशान मिटा दे।बच्चों पर हमें अपनी कौम को बचाना चाहिए और हिंदुओं को सबक सिखाना चाहिए।और अपनी जेब से पैसे निकालकर अहमद को देता है और कहता है यै पैसे कुछ तू रख और कुछ दोस्तों को देना और कहना जवानों पर पथ्थर फेंके और जवानों को भगा दें मै तुम बच्चों को और पैसे दूँगा ।
तीनोँ हैरानी से गुलफाम को देखतेहै
अहमद -नहीं मामू वो जवान अपने परिवार से दूर हमारी रक्षा कर रहे है ,हम उन्हें पथ्थर नहीं मार सकते और पैसे वापस करता है
फिर रजिया अहमद शाबाश बेटा और गुलफाम से शांत हो जाओ भाईजान ,समझो सैनिकों ने इसलिए नहीं कि वो मुसलमान थे ,बल्कि इसलिए मारा कि वो आंतकवादी थे ,और हथियारों के साथ पकड़े गए हैं ।वर्ना न जाने कितने बेगुनाह इनके शिकार होते।तू परेशान मत हो बुरे का अंजाम बुरा ही होता है ।चलो अब चलकर गरम -गरम कहवा पिते है । गुलफाम - अरे! नही मुझे नहीं पीना तुम तीनों पियो ,तब तक मै देखकर आता हूँ ,माजरा क्या है और तेज कदमों से मौकाय वारदात पर पँहुचता है ,देखता सब खुश हो रहे है ,और लौट आता है ।गुलफाम बिना मन के खाना खाकर बिस्तर पर आ गया ,नींद कौसो दूर थी।सब के सो जाने के बाद अपने आका से बात करता है।और नाराज होकर कहता है आपने लड़ाको को भेजने में जल्दी क्ँयू की एक बार मुझसे बात करते तो मै आपको मना करता अभी बहुत सख्ती चल रही है इस हरकत से मैं भी दुश्मनों (सैनिकों)की निगाहों में आ जाउँगा।
आका - मियां तुम जिस रफ्तार से काम कर रहे हो उससे तो लगता है किसी दिन पाकिस्तान हिंदुस्तान का हो जायेगा।
गुलफाम -आप फिक्र मत करिए जनाब जल्द ही हम हिंदुस्तान को नेस्तनाबूद कर देगें बस दो -चार दिन खुदाआफि़ज और आकर सो जाता है ।
एक दिन रोज रजिया कपड़े धो रही थी अहमद आया
अहमद ,रजिया के गले में बाहें डालकर अम्मी मेरी एक बात मानोगी ।
रजिया -कया बात है?
अहमद -अम्मी मामूजान नही है मै उनका लैपटॉप चला लूँ क्या?मेरा बहुत मन कर रहा है।मेरे सब दोस्तों के पास है (उदास होकर)मैने कई बार अपने दोस्तों का चलाया है पक्का मै ध्यान से बस थोड़ी देर चलाउँगा मामू के आने से पहले सहीसलामत रख दूँगा ।
रजिया ना ना उस कमरे में मत जाइयो बेटा वो पाकिस्तान से आऐ है कोई कागजात गुम हो गये तो मामू मुसीबत में पड़ जाएंगे।और वो वो वो कया ?
अहमद -लैपटॉप ,(उदास होकर)अम्मी एक बार।
रजिया -अच्छा जा खराब नही करना जल्दी आना ,फिर रुक मै चलती हूँ ,तू मामू की सारी चीजें बिखेर देगा।दोनो जाते देखते है कमरे ओ ताला लगा हुआ है ।
रजिया - कोई बात नहीं मामू आएंगे तो मैं लेके दे दूँगी और मुड़ते है तभी अहमद की नजर खिड़की पर जाती है जो ऐसे ही बंद थी।अम्मी देखो खिडकी खुली है मै खूद के अंदर से लगता हुँ ,रजिया तू नहीं मानेगा और अहमद खिड़की के रास्ते अंदर जाता है ।
अहमद जैसे ही अंदर घुसता है, हैरान हो जाता है कि कमरा बिल्कुल अलग तरह की तारों और स्पुकरो से जुड़ा है ,सब जगह तारे ही तारें स्कीरीन लगी हुई है और माइक्रोफोन लगा हुआ है ,लेपटॉप इधर -उधर ढूंढता है, संदूक खोलता है ,अंदर रखे सामान को देखकर उसके ह़ोश उड़ जातें है ,वो जल्दी से रजिया को खिड़की से अंदर ले आता है ,वो भी देखकर हैरान हो जाती है ,फिर अहमद उसे याद दिलाता है कि ये बम बनाने का सामान है ,सैनिकों ने कित्ती दफे अपने को दिखाया है (अपने बचाव के लिए)और इस तरह का सामान और इन सामान को रखने वालो की सूचना सेना को देने की कहते है।फिर दोनो को समझ आ जाता है कि गुलफाम एक आंतकवादी है और। हमारे मुल्क में बर्बादी के इरादे से आया है ।फिर सारा सामान ज्यों का त्यों रखकर दोनों जल्दी खिड़की से बाहर आ जाते है और जैसे बं थी खिड़की बंद कर देते है ।थोड़ी देर में गुलफाम आ जाता है और पिछे -पिछे फैजल भी ।रजिया क्या बात है आज दोनोँ साध -साथ ,अब जल्दी हाथ धोकर आ जाओ खाना खायें सब खाना खा लेते है फिर रजिया अहमद से आज तू बहुत रका हुआ है ,अभी जाकर सो जा।फैजल -अम्मी काहे का थका हुआ है ,कौनसी मजदूरी करके आया है। सारा दिन इधर -उधर होता रहता है कित्ती दफे कहा है ,दिन में थोड़ा आराम कर लिया कर परिक्षाएं नजदीक आ रही हैं ,अभी उसको पढने दो अम्मी तुम्हारे लाड़-प्यार ने इसे बिगाड़ दिया है।रजिया - आज रहने दे ,आज इसकी तबियत भी ठीक नही है आराम करेगा तो ठीक हो जाएगा ।कल से रोज रात में पढ़ाई कर लेगा ,रजिया जा अहमद जाके सो जा और हाँ गोली पानी के गिलास के पास रखी है याद से ले लेना।और फैजल तू भी जाकर सोजा रात में एक -दो भाई की खैर ले लेना फिर थोड़ी देर रजिया और गुलफाम बातें करते फिर वो भी सो जाते है ।गुलफाम के सोने के बाद रजिया फैजल के कमरे मे आती है अहमद और रजिया उसे सारी बात बताते है ।फैजल - अहमद तुझे पक्का यकीन है ।
अहमद-हाँ भाईजान जवानों ने कितनी ये मौत के सामान मोहल्ले में दिखाया है हमारे स्कूल में भी दिखाया गया है मुझे पक्का यकीन है ।
फैजल सदमें में आ जाता है फिर अम्मी की तरफ देखता है ,उसके चेहरे पे भाई के धोखे का दुख साफ नजर आता है ।
रजिया - तू मेरी फिकर मत कर ,मै ठीक हुँ ।फिर तय करते है कि अहमद जाकर जवानों को खबर करेगा और फैजल होशियारी से जितनी जल्दी हो सके मौहल्ला खाली करवा लेगा ,इस बीच अगर सुबह हो गई या गुलफाम उठ गया तो रजिया उसे अंदर बातो में उलझाए रखेगी ।
अहमद जवानों को खबर करने निकल गया और फैजल मोहल्ला खाली करवा रहा था ,शोरगुल की आवाज सुनकर गुलफाम बाहर आता है रजिया से पूछता है कि तू जाग क्यूँ रही है ,और बाहर शोरगुल कैसा है।
रजिया - मै भी अभी अभी उठी हूँ कुछ नही कभी कभी पास के जंगल से जानवर आ जाते है । वो ही शोर होगा हमारे घर के सारे दरवाजे बंद है ,हमको कोई खतरा नहीं है। मै तो सो रही हूँ तू भी जा के सो जा ।
गुलफाम -जाते जाते अचानक खिड़की की तरफ जाता ठ है देखने के लिए रजिया मना करती है जब तक खिड़की के पास आए तब तक गुलफाम खिड़की खोल चुका था। बाहर से ,भागो -भागो की आवाजे आती है।तभी गुलफाम की नज़र फैजल पर पड़ती है ,जो सबको चुपचाप बाहर निकलने को कह रहा था ,रजिया गुलफाम को बातों मे उलझाने की कोशिश करती है लेकिन गुलफाम दरवाजा खोलता है और दूर से जवानो को भी आता देखता है ,दोनो बाहर आतें है ।
गुलफाम - (रजिया से )ये सब क्या है ,तुने मुझे धोखा दिया।
रजिया - धोखा मैने दिया कि बहन को धोखा दे रहा है ,उस कमरे में कौनसी साजिशें रच रहा है तू मुझसे मिलने नहीं हमको दबाह करने आया है ।
गुलफाम -अच्छा तो तुम्हें सब पता चल गया ,फिर जोर जोर से चिल्लाकर कहता है अगर कोई मेरी तरफ आया तो मैं बारुद के ढेर लगा दूँगा।
सेना के जवान आत्मसमर्पण करने को कहते है, गुलफाम घर के अंदर जाता है बारुद लाने के लिए
जवान सबको पिछे हटने को कहते है तभी रजिया की नज़र जलते हुए अलाव पर पड़ती है वो उसमें से एक जलती लकड़ी उठाती है दोड़कर लकड़ी गुलफाम के कमरे में फेकती है कई धमाके होते है और देखते ही देखते घर राख में तबदील हो जाता है।
फैजल रजिया के पास आकर उसे गले लगाता है , रजिया रोने लगती है अहमद भी उनसे गले लग कर रोने लगता हैँ।
जवान - चची आप बहादुर हो हम सबको आप पर गर्व है जब तक आपके घर की मरम्मत नहीं हो जाती तब तक आप सरकारी गेस्ट हाउस में रहेंगे और मरम्मत का खर्चा सरकार ही उठाएगी।
By Asha Jaisinghani

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