Shikayat
By Mohammad Imran Khan
मैं ख़्वाबों में उनका तसव्वुर करना चाहता हूँ l
मगर वो इसको मेरी गलत-फहमी समझ लेंगे ll
मैं उनको ख्यालों में याद आना चाहता हूँ l
मगर वो इसको बुरा ख़्वाब समझ लेंगे ll
मैं उनके बुरे वक़्त में काम आना चाहता हूँ l
वो इसको मेरी मजबूरी समझ लेंगे ll
मैं रात-भर जागकर उनको सोचना चाहता हूँ l
वो मेरी सोच को मेरी बीमारी समझ लेंगे ll
मैं अब उनको भूलना चाहता हूँ l
वो इसको मेरी याद्दाश्त की कमज़ोरी समझ लेंगे ll
मैं टक-टकी लगाकर उनका दीदार करना चाहता हूँ l
वो इसको मेरे जिस्म की हवस समझ लेंगे ll
कमबख़्त मैं उनकी ख़ातिर अपनी जान भी दे दूँ l
मगर वो इसको मेरी ख़ुदख़ुशी समझ लेंगे ll
मैं उनकी सारी शिकायतें उनसे करना चाहता हूँ l
मगर वो इसकी भी शिकायत ख़ुदा से कर देंगे ll
By Mohammad Imran Khan

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