Shikayat
By Shraddha Trivedi
आईने में खुद को पहचान न सके,
आईना क्यों तोड़ दिया ?
तरन्नुम में गा न सके,
साज़ को क्यों मोड़ दिया ?
छलका तो महज़ प्याला था,
दामन क्यों छुडाया शराब से ?
खुदाई से गर परे रहे,
खुदा को क्यों भूला दिया ?
By Shraddha Trivedi

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