Shershah
Updated: Sep 16, 2025
By Harsh Mishra
हस्ती की हुंकार सा,
सिंह की दहाड़ सा,
बज की मागं चाल सा,
मनुष्य वो कमल था।
माता, पिता, प्रेमी, घर,
छोड़ उन सभी को एक ओर,
सरहद पर खड़ा था सीना तन वो,
भारत माँ का प्रिय लाल वो।
युद्ध का मैदान था वो,
जंग घमासान था वो,
चारो और हाहाकार थी ,
भारत माता के दमन की वो बात थी।
छाती पर तिरंगा लिए
करता गया वो रिपु दमन
भारत माता के उस लाल को
शेरशाह नमक उस मशाल को
आज मेरा शत शत नमन
आज मेरा शत शत नमन…………….
By Harsh Mishra

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