Shaheed
By Bhavay Goyal
कहते है मेरी उम्र के नौजवान,
अंग्रेज़ी हुकूमत से लड़े थे।
मैं सच बोलने से डरता हूँ,
वह निडर अपने मुल्क के लिए खड़े थे।
मुझे कल की फ़िक्र रहती है,
वह आज फाँसी पर चढ़े थे।
२३ मार्च को, २३ साल के ३ नौजवान,
बड़े बड़ों को जीना सीखा गए।
कौन कहता है समझदारी सिर्फ़ उमर के साथ आती है,
तीन युवक जाते जाते
सबके दिलों में आग लगा गए।
By Bhavay Goyal

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