Saubhagyavathi
Updated: Jun 5, 2023
By L . Ashwini Reddy
लड़की होना सौभाग्य है
विभिन्न भूमिकाओं में ढलती हैं
पृथ्वी रूपी मंच पर आकर
माँ पत्नी और बेटी बनती हैं
परिवार में जब एक लड़की पैदा होती है
माँ बाप की आखों का तारा और नन्ही पारी होती हैं
लक्ष्मी का रूप बनकर घर में बरकत लाती है
तभी बेटी कहलाती है।
सात फेरे लेकर शादी के बंधन में बांधती है
कन्यादान होते ही माँ बाप से दूर होती है
मायका छोड़ ससुराल के कर्त्तव्य निभाती है
तभी पत्नी कहलाती है।
नौ महीने कोख में पालकर
पल पल शिशु का ख्याल रखकर
प्रसव का दर्द सहकर बच्चा पैदा करती है
तभी माँ कहलाती है एक लड़की।
धैर्य और साहस का प्रतीक होती
ममता और करुणा की मूरत होती है
प्यार और इज़्ज़त से सम्मानित की जाए तो
घरकोस्वर्गबनादेतीहैलड़की।
By L . Ashwini Reddy

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